ज़िंदगी बदलती है जब हम खुद को समझते हैं, यही बात बालन ने अपने अनुभव से सीखी।
बालन असली नाम नहीं है। वो तीस साल का है और भारत के भाग-दौड़ वाले माहौल में रहता है। उसकी कहानी उस सफर की है, जिसमें शादी, काम और परिवार को संभालते हुए भी वह अंदर के डर और चुनौतियों से लड़ता है।
बालन शांत, समझदार और अंदर से सोचने वाला इंसान है। घर में उसकी चुप्पी कई बार दूरी का कारण बनती थी। पत्नी सोचती थी कि वो खुल कर क्यों नहीं बोलता। दफ्तर में लोग उसकी समझदारी को सराहते थे, लेकिन वह खुद को सबसे दूर महसूस करता था।
आरामदायक स्थिति के बावजूद बालन अपनी परेशानियों को खुद के अंदर ही दबा कर रखता। उस से कभी-कभी रिश्तों में खटास आ जाती और वो अकेला महसूस करता।
तनाव के समय वह और भी अलग-थलग हो जाता। दफ्तर में टीम वर्क से बचता, डरता कि लोग उसका आईडिया खराब कर देंगे। घर में भी वह घरवालों से मदद मांगने की बजाय खुद ही सब सुलझाना चाहता था।
उसके इन व्यवहारों का कारण था – अंदर का डर और नियंत्रण की चाह। वह खुद को कमजोर नहीं दिखाना चाहता था, इसलिए सभी भावनाओं को छुपा लेता।
कुछ जवाब ढूंढ़ते हुए बालन एक ऐसे फ्रेमवर्क से मिला (Enneagram) जिसने उसकी पुरानी आदतों और सोच को सामने ला दिया। असल में, उसकी सबसे बड़ी जरूरत थी खुद को सक्षम मानना – लेकिन वह इस प्रोसेस में रिश्तों से दूर होता गया।
गहराई से सोचने पर उसे समझ आया, कि दूरी, अकेलापन और हर बात में खुद ही सही होना चाहना दरअसल उसकी अंदर की ख्वाहिशों से जुड़ा था।
"जागृति का मतलब है खुद को समझना, बदलना नहीं।" — बालन
इस प्रोसेस से बालन को यह पता चला कि बदलाव खुद को दोषी महसूस करने से नहीं, बल्कि अंदर की सोच को पहचानने से आता है।
जब कभी तनाव आता, बालन और भी खुद में सिमट जाता। ज्ञान जमा करता, मगर रिश्तों में दूरी आ जाती। पत्नी ने महसूस किया कि वह उससे दूर होता जा रहा है। दफ्तर में भी लोग उससे खुलकर बातचीत नहीं कर पाते थे।
उसकी असल वजह थी - कमजोरी से बचना और खुद को सुरक्षित रखना। मगर यह बचाव ही उसे अकेला बना देता।
समाधान था - थोड़ी हिम्मत जमा करना, दूसरों से बातचीत करना, और अपनी भावनाओं को बताना। जब वह खुलकर बात करने लगा, तो रिश्तों की गर्माहट फिर से आने लगी।
अब बालन ने सच्चे बदलाव को महसूस किया:
जब उसने अपने अंदर की जरूरतों को पहचाना, तब असली खुशी आई।
असली बदलाव खुद को समझने से शुरू होता है। गहराई से सोचिए – आप क्यों ऐसा करते हैं, क्या सोच आपके व्यवहार के पीछे है। बालन जैसी जागरूकता आपकी जिंदगी, काम और आत्मा में भी बड़ा बदलाव ला सकती है।